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प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन ने जीता वुल्फ पुरस्कार, यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय मूल के भौतिक विज्ञानी बने
क्वांटम भौतिकी में ‘कंपोजिट फर्मियन’ सिद्धांत के लिए सम्मानित प्रो. जैनेंद्र जैन को विज्ञान जगत के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक वुल्फ पुरस्कार मिला है।

खबर के मुख्य बिंदु
- प्रो. जैनेंद्र के. जैन को वुल्फ पुरस्कार इन फिजिक्स से सम्मानित किया गया।
- वे इस सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय मूल के भौतिक विज्ञानी बने हैं।
- यह पुरस्कार उन्हें कंपोजिट फर्मियन सिद्धांत के लिए दिया गया।
- उनका यह सिद्धांत फ्रैक्शनल क्वांटम हॉल इफेक्ट को समझाने में बेहद अहम माना जाता है।
- प्रो. जैन वर्तमान में Penn State University में प्रोफेसर हैं।
- वे भारत में Lodha Theoretical Physics Institute से भी जुड़े हैं।
- वुल्फ पुरस्कार को विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल के बाद सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है।
- 2025 के वुल्फ प्राइज इन फिजिक्स में प्रो. जैन के साथ James P. Eisenstein और Mordehai Heiblum भी सम्मानित किए गए थे।
- प्रो. जैन का सफर राजस्थान के एक साधारण परिवेश से शुरू होकर वैश्विक वैज्ञानिक उपलब्धि तक पहुंचा।
Quick Summary
भारतीय मूल के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन को वुल्फ पुरस्कार मिलने की खबर भारतीय विज्ञान जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्हें यह सम्मान क्वांटम पदार्थ और विशेष रूप से शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार को समझाने वाले उनके ऐतिहासिक “कंपोजिट फर्मियन” सिद्धांत के लिए दिया गया है। यह सिद्धांत फ्रैक्शनल क्वांटम हॉल इफेक्ट की व्याख्या करने में मील का पत्थर माना जाता है और आधुनिक क्वांटम भौतिकी के विकास में इसकी अहम भूमिका रही है। वुल्फ पुरस्कार को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मानों में गिना जाता है और इसे अक्सर नोबेल पुरस्कार के बाद सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। प्रो. जैन की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक प्रतिभा की वैश्विक पहचान का भी प्रतीक है।






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