जंतर-मंतर पर CJP का धरना तीसरे दिन भी जारी, पानी न होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने डटे रहने का लिया संकल्प
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अधिकारियों से जंतर-मंतर के सार्वजनिक शौचालयों में पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग की। प्रदर्शनकारी परीक्षा अनियमितताओं और NEET पेपर लीक मामले को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
By Payal SinghPublished 22 Jun 2026, 03:11 PMUpdated 27 Jul 2026, 07:25 PM4 min read15 views
सार्वजनिक शौचालयों में पानी की आपूर्ति ठप होने की शिकायत।
अभिजीत दिपके ने अधिकारियों से पानी बहाल करने की मांग की।
आंदोलन NEET पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ है।
CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
प्रदर्शनकारी आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग भी कर रहे हैं।
दिपके ने आरोप लगाया कि पुलिस पानी और केले दान करने वालों से भी पहचान-पत्र और पता पूछ रही है।
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Quick Summary
जंतर-मंतर पर चल रहा यह प्रदर्शन अब केवल एक विरोध नहीं, बल्कि छात्र असंतोष, परीक्षा व्यवस्था पर अविश्वास और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग का प्रतीक बनता जा रहा है। पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद प्रदर्शनकारियों का डटे रहना आंदोलन की गंभीरता को दिखाता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि CJP का यह धरना केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गया है। अब इसमें छात्र आत्महत्याएं, संस्थागत जवाबदेही, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे बड़े मुद्दे शामिल हो चुके हैं। यदि यह आंदोलन लंबा खिंचता है, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर छात्र राजनीति और शिक्षा प्रशासन दोनों पर असर डाल सकता है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी रातभर धरने पर बैठे रहे और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया। यह धरना कथित परीक्षा अनियमितताओं, NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है।
पानी न होने पर भी नहीं हटे प्रदर्शनकारी
धरने के तीसरे दिन सबसे बड़ा मुद्दा पानी की आपूर्ति ठप होना बन गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जंतर-मंतर स्थित सार्वजनिक शौचालयों में लगातार पानी नहीं आ रहा, जिससे स्वच्छता और बुनियादी जरूरतों का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाते हुए अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि जंतर-मंतर के शौचालयों में पानी की आपूर्ति तुरंत बहाल की जानी चाहिए। दिपके ने कहा कि लगातार दूसरी बार ऐसी स्थिति बनी है, जिससे धरने पर बैठे लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
आंदोलन क्यों हो रहा है?
CJP का यह प्रदर्शन कथित NEET पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ियों और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर हो रहा है। प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि 3 मई को हुई NEET परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं पर अब तक पर्याप्त जवाबदेही तय नहीं की गई। इसी के साथ आंदोलनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के लिए शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग
प्रदर्शन का एक और बड़ा मुद्दा उन छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिलाना है, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा विवादों और शैक्षणिक दबाव के बीच अपनी जान गंवाई। CJP की मांग है कि ऐसे प्रत्येक छात्र के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। आंदोलनकारी इसे केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि राज्य की जवाबदेही का प्रतीकात्मक स्वीकार मानते हैं। उनका कहना है कि जब परीक्षा प्रणाली की विफलताएं छात्रों को मानसिक और सामाजिक संकट में धकेलती हैं, तो सरकार को उसके परिणामों की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।
पुलिस पर निगरानी का आरोप
अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि धरने में मदद करने वाले लोगों जैसे पानी, केले या अन्य सामग्री दान देने वाले समर्थकों से पुलिस पहचान पत्र और आवासीय पते की जानकारी मांग रही है। दिपके ने इसे प्रदर्शनकारियों और समर्थकों पर दबाव बनाने की कोशिश बताया। हालांकि पुलिस की ओर से इस आरोप पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन धरना स्थल के आसपास भारी बैरिकेडिंग और सुरक्षा बलों की तैनाती से साफ है कि प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है।
अनुमति समाप्त, लेकिन धरना जारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयोजकों को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि उनके प्रदर्शन की आधिकारिक अनुमति शनिवार दोपहर तक ही वैध थी। इसके बावजूद CJP ने धरना जारी रखने का फैसला किया। इसका मतलब है कि अब आंदोलन एक अधिक टकरावपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां एक ओर प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन पर कानून-व्यवस्था और प्रदर्शन प्रबंधन का दबाव बढ़ रहा है।
लंगर और लस्सी के सहारे जारी आंदोलन
धरना स्थल पर मौजूद स्वयंसेवक प्रदर्शनकारियों के लिए लंगर और लस्सी की व्यवस्था कर रहे हैं, ताकि लंबे धरने के दौरान लोग टिके रह सकें। यह व्यवस्था बताती है कि आंदोलन केवल कुछ घंटों या एक दिन का प्रतीकात्मक विरोध नहीं रह गया है, बल्कि इसे लंबे समय तक जारी रखने की तैयारी की जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे तब तक जंतर-मंतर नहीं छोड़ेंगे, जब तक उनकी मुख्य मांगों पर सरकार कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं करती।
आगे क्या?
जंतर-मंतर पर चल रहा यह धरना अब दिल्ली की एक स्थानीय विरोध घटना से आगे बढ़कर राष्ट्रीय छात्र असंतोष की अभिव्यक्ति बनता जा रहा है। यदि प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच जल्द कोई समाधान नहीं निकलता, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही रहेगा कि क्या सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों—विशेषकर जवाबदेही, मुआवजा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कोई ठोस प्रतिक्रिया देती है, या यह आंदोलन और तेज होता जाएगा।
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