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केंद्र ने तुषार मेहता का कार्यकाल 3 साल बढ़ाया, 2029 तक सॉलिसिटर जनरल बने रहेंगे

केंद्र सरकार ने तुषार मेहता का कार्यकाल 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2029 तक बढ़ा दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का पक्ष रखने वाले 5 अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरलों की भी पुनर्नियुक्ति की गई है।

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केंद्र ने तुषार मेहता का कार्यकाल 3 साल बढ़ाया, 2029 तक सॉलिसिटर जनरल बने रहेंगे

खबर के मुख्य बिंदु

  • तुषार मेहता का कार्यकाल 3 साल के लिए बढ़ाया गया।
  • अब वह 30 जून 2029 तक भारत के सॉलिसिटर जनरल बने रहेंगे।
  • नया कार्यकाल 1 जुलाई 2026 से शुरू होगा।
  • यह उनका चौथा कार्यकाल होगा।
  • केंद्र ने 5 अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरलों की भी पुनर्नियुक्ति की है।
  • तुषार मेहता ने हाल के वर्षों में केंद्र की ओर से कई हाई-प्रोफाइल और संवैधानिक मामलों में पैरवी की है।
  • फैसला ऐसे समय आया है, जब सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों में कई अहम मामले लंबित हैं।
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Quick Summary

तुषार मेहता के कार्यकाल विस्तार को केंद्र सरकार की कानूनी रणनीति में निरंतरता बनाए रखने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। सॉलिसिटर जनरल का पद केवल अदालत में सरकार का पक्ष रखने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह सरकार की संवैधानिक, नीतिगत और राजनीतिक रूप से संवेदनशील कानूनी लड़ाइयों का प्रमुख चेहरा भी होता है। मेहता ने हाल के वर्षों में कई बड़े मामलों में केंद्र का प्रतिनिधित्व किया है। ऐसे में उनका कार्यकाल बढ़ाना इस बात का संकेत है कि सरकार मौजूदा कानूनी टीम पर भरोसा बनाए रखना चाहती है खासतौर पर तब, जब कई महत्वपूर्ण मामले अभी भी अदालतों में विचाराधीन हैं।

केंद्र सरकार ने तुषार मेहता को भारत के सॉलिसिटर जनरल (SG) के पद पर अगले तीन वर्षों तक बनाए रखने का फैसला किया है। इस फैसले के तहत उनका कार्यकाल 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2029 तक बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही वह 2029 तक देश के दूसरे सर्वोच्च विधि अधिकारी के रूप में कार्य करते रहेंगे। यह तुषार मेहता के लिए लगातार तीसरा कार्यकाल विस्तार है, जबकि कुल मिलाकर यह उनका चौथा कार्यकाल होगा। केंद्र सरकार ने उनके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से पेश होने वाले 5 अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरलों (ASGs) की भी पुनर्नियुक्ति की है।

सॉलिसिटर जनरल की भूमिका क्यों अहम है?
भारत के अटॉर्नी जनरल के बाद सॉलिसिटर जनरल देश का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण विधि अधिकारी होता है। यह पद सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट्स और अन्य न्यायिक मंचों पर प्रमुख मामलों में पैरवी करने का काम करता है। सॉलिसिटर जनरल का दायित्व केवल मुकदमों में बहस करना ही नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों, फैसलों और संवैधानिक रुख को अदालतों के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना भी होता है। इस काम में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल उनकी मदद करते हैं।

कई बड़े मामलों में सरकार का पक्ष रख चुके हैं तुषार मेहता
तुषार मेहता हाल के वर्षों में केंद्र सरकार के सबसे प्रमुख कानूनी चेहरों में रहे हैं। उन्होंने केंद्र की ओर से कई संवैधानिक, राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिकता, कराधान, डिजिटल रेगुलेशन, चुनाव और केंद्र-राज्य विवादों से जुड़े अहम मामलों में पैरवी की है। उनकी लगातार पुनर्नियुक्ति को इस रूप में देखा जा रहा है कि सरकार अपनी मौजूदा कानूनी टीम और उसकी रणनीति पर भरोसा बनाए रखना चाहती है।

5 ASGs की भी पुनर्नियुक्ति
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सरकार ने तुषार मेहता के साथ सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का पक्ष रखने वाले 5 अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरलों की नियुक्ति भी आगे बढ़ाई है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में सभी नामों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन इन अधिकारियों की भूमिका भी सरकार के कानूनी मोर्चे पर बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

लंबित मामलों के बीच लिया गया फैसला
यह विस्तार ऐसे समय पर आया है, जब सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों में कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और नीतिगत मामले लंबित हैं। ऐसे मामलों में सरकार आमतौर पर अनुभवी विधि अधिकारियों को बनाए रखना चाहती है, ताकि अदालत में पेश की जाने वाली दलीलों और कानूनी रणनीति में एकरूपता और निरंतरता बनी रहे। सरकार का मानना है कि पहले से लंबित मामलों से परिचित वरिष्ठ विधि अधिकारी इन मामलों को बेहतर ढंग से संभाल सकते हैं और नीति-निर्माण से जुड़े कानूनी मुद्दों पर सरकार का पक्ष अधिक प्रभावी तरीके से रख सकते हैं।

2029 तक अहम भूमिका में रहेंगे मेहता
इस फैसले के बाद तुषार मेहता आने वाले तीन वर्षों तक केंद्र सरकार की कानूनी रणनीति और अदालतों में उसके प्रतिनिधित्व का एक प्रमुख चेहरा बने रहेंगे। इसका असर उन सभी बड़े मामलों पर पड़ेगा, जिनका संबंध शासन, सार्वजनिक नीति, संवैधानिक प्रश्नों और केंद्र सरकार के फैसलों से है।

Payal Singh

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