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शादी का वादा पूरा न होने से हर रिश्ता ‘बलात्कार’ नहीं बन जाता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 साल पुराने केस की कार्यवाही रद्द की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक चला सहमति आधारित संबंध केवल इसलिए बलात्कार नहीं माना जा सकता क्योंकि बाद में शादी नहीं हुई। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में यह साबित होना जरूरी है कि शादी का वादा शुरुआत से ही झूठा था और उसी धोखे के आधार पर सहमति ली गई थी। इसी आधार पर अदालत ने 2019 के एक मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

