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13,200 फीट ऊंचे शिपकी ला बॉर्डर पर सेना-ITBP जवानों ने किया योग, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष शिविर आयोजित

किन्नौर जिले के भारत-तिब्बत सीमा क्षेत्र शिपकी ला में आयोजित इस विशेष योग शिविर में भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवानों ने हिस्सा लिया। आयुष विभाग ने लगातार दूसरे वर्ष इस कार्यक्रम का आयोजन किया।

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13,200 फीट ऊंचे शिपकी ला बॉर्डर पर सेना-ITBP जवानों ने किया योग, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष शिविर आयोजित

खबर के मुख्य बिंदु

  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर शिपकी ला बॉर्डर में विशेष योग शिविर आयोजित किया गया।
  • शिविर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में 13,200 फीट की ऊंचाई पर लगा।
  • कार्यक्रम में भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवानों ने हिस्सा लिया।
  • आयोजन आयुष विभाग ने लगातार दूसरे वर्ष कराया।
  • जवानों ने योगासन, प्राणायाम और श्वास तकनीकों का अभ्यास किया।
  • शिविर का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना था।
  • अधिकारियों के अनुसार, योग से फेफड़ों की क्षमता, सहनशक्ति, एकाग्रता और मानसिक मजबूती बढ़ती है।
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Quick Summary

भारत-तिब्बत सीमा के नजदीक शिपकी ला जैसे कठिन और ऊंचाई वाले क्षेत्र में योग शिविर का आयोजन केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों के स्वास्थ्य और मनोबल से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों को कम ऑक्सीजन, कठोर मौसम और लंबे समय तक परिवार से दूर रहने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से योग, प्राणायाम और श्वास अभ्यास को उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। यह पहल बताती है कि सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ जवानों की मानसिक स्थिरता, शारीरिक फिटनेस और भावनात्मक संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

हिमाचल प्रदेश के आदिवासी बहुल किन्नौर जिले में भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित शिपकी ला में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक विशेष योग शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर लगभग 13,200 फीट की ऊंचाई पर आयोजित हुआ, जहां भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों ने योगाभ्यास किया। यह कार्यक्रम आयुष विभाग द्वारा आयोजित किया गया, जिसने लगातार दूसरे वर्ष इस तरह के विशेष सीमावर्ती योग शिविर का आयोजन किया। शिविर का उद्देश्य सीमावर्ती और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात जवानों के बीच स्वास्थ्य, फिटनेस और मानसिक संतुलन को बढ़ावा देना था।

सेना और ITBP जवानों ने किया योगाभ्यास
योग शिविर में मौजूद जवानों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और श्वास तकनीकों का अभ्यास किया। अधिकारियों के मुताबिक, इन अभ्यासों का उद्देश्य जवानों की फेफड़ों की क्षमता, सहनशक्ति, एकाग्रता और मानसिक मजबूती को बढ़ाना है। सीमावर्ती इलाकों में तैनात जवानों को बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। शिपकी ला जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम ऑक्सीजन, कड़ाके की ठंड, खराब मौसम और परिवार से लंबे समय तक दूर रहना रोजमर्रा की चुनौती होती है। ऐसे में योग और प्राणायाम उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

आयुष विभाग की लगातार दूसरी पहल
जिला आयुष अधिकारी प्रवीण शर्मा ने बताया कि इस तरह के शिविर का मुख्य उद्देश्य जवानों के बीच योग के निवारक और स्वास्थ्यवर्धक लाभों को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। उनका कहना है कि ऊंचाई वाले और दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाकर्मियों के लिए नियमित योगाभ्यास बेहद उपयोगी हो सकता है। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को लचीला या फिट रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तनाव कम करने, ध्यान केंद्रित रखने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है। सीमावर्ती ड्यूटी के दौरान ये सभी पहलू जवानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
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सीमाओं की सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य पर भी फोकस
शिपकी ला हिमाचल प्रदेश का एक अहम सीमावर्ती क्षेत्र है, जहां भारत-तिब्बत सीमा के नजदीक कई सुरक्षा चौकियां स्थित हैं। इन पोस्टों पर तैनात जवानों को सामान्य इलाकों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित यह शिविर इस बात का संकेत है कि सुरक्षा बलों के लिए फिटनेस, मानसिक लचीलापन और समग्र स्वास्थ्य अब प्रशिक्षण और ड्यूटी संस्कृति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।

योग बना सीमावर्ती जीवनशैली का हिस्सा
हाल के वर्षों में सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच योग को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाने पर जोर बढ़ा है। विशेषकर ऊंचाई वाले इलाकों, सीमावर्ती चौकियों और कठिन तैनाती वाले क्षेत्रों में योग को एक ऐसे अभ्यास के रूप में देखा जा रहा है, जो जवानों को शारीरिक थकान, मानसिक दबाव और एकाकीपन से निपटने में मदद करता है। शिपकी ला में आयोजित यह योग शिविर केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि उन जवानों के स्वास्थ्य के प्रति एक संदेश है, जो देश की सीमाओं की रक्षा के लिए विषम परिस्थितियों में डटे रहते हैं।

Payal Singh

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