फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार असम के जोरहाट AN-32 विमान हादसे में शहीद हुए थे।
परिवार का आरोप है कि 21 लाख रुपये का चेक एक महिला को पत्नी मानकर दे दिया गया।
परिवार का कहना है कि उन्हें शुभम की शादी की जानकारी नहीं थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार को शुभम और उस महिला के रिश्ते की जानकारी थी, लेकिन कोर्ट मैरिज की नहीं।
पिता ने आरोप लगाया कि महिला श्राद्ध/अंतिम रस्मों से पहले चली गईं।
परिवार ने रक्षा मंत्री और संबंधित अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप की अपील की है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि मुआवज़ा देने से पहले वैवाहिक दावे का सत्यापन कैसे हुआ।
अब यह मामला परिवार, वैवाहिक स्थिति और मुआवज़ा प्रक्रिया को लेकर चर्चा में है।
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Quick Summary
असम के जोरहाट में हुए भारतीय वायुसेना के AN-32 विमान हादसे में शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत के बाद अब उनके परिवार में मुआवज़े को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परिवार का आरोप है कि बिहार सरकार की 21 लाख रुपये की सहायता राशि एक ऐसी महिला को सौंप दी गई, जिसे अधिकारी शुभम की पत्नी मान रहे हैं, जबकि परिवार को इस शादी की जानकारी नहीं थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, शुभम के पिता ने यह भी कहा है कि परिवार को उनके रिश्ते की जानकारी थी और शादी के लिए सहमति भी थी, लेकिन कोर्ट मैरिज की सूचना नहीं थी। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि सहायता राशि लेने के बाद महिला अंतिम संस्कार/श्राद्ध की रस्मों से पहले चली गईं। अब परिवार ने पूरे मामले की जांच और वैवाहिक दावे की कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
असम के जोरहाट में हुए भारतीय वायुसेना के AN-32 विमान हादसे में शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के परिवार ने अब मुआवज़े को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि शुभम की मौत के बाद 21 लाख रुपये की सहायता राशि एक महिला को पत्नी मानकर दे दी गई, जबकि उन्हें इस विवाह की जानकारी नहीं थी।
21 लाख की सहायता राशि को लेकर विवाद
रिपोर्ट्स के अनुसार, शुभम कुमार के परिवार का कहना है कि हादसे के बाद बिहार सरकार की ओर से दी गई ₹21 लाख की आर्थिक सहायता एक महिला को सौंप दी गई। परिवार का दावा है कि अधिकारियों ने उसे शुभम की पत्नी के रूप में मान्यता दी, लेकिन परिवार को इस शादी की जानकारी नहीं थी। इसी वजह से अब परिवार ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
परिवार को रिश्ते की जानकारी थी, कोर्ट मैरिज की नहीं
सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, शुभम के पिता ने कहा है कि परिवार को शुभम और संबंधित महिला के रिश्ते के बारे में पता था और वे उनके विवाह के पक्ष में भी थे, लेकिन कोर्ट मैरिज की जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी। इस वजह से परिवार अब यह जानना चाहता है कि आधिकारिक तौर पर पत्नी का दर्जा किस आधार पर और किन दस्तावेजों के आधार पर दिया गया।
‘श्राद्ध से पहले चली गईं’
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि जिस महिला को सहायता राशि दी गई, वह श्राद्ध/अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्मों से पहले ही चली गईं। इस बात ने परिवार की नाराजगी और बढ़ा दी है। पिता का कहना है कि कानूनी अधिकार अपनी जगह है, लेकिन इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहना भी जरूरी था।
रक्षा मंत्री और अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
शुभम कुमार के पिता ने रक्षा मंत्री और संबंधित अधिकारियों से इस मामले में मदद की अपील की है। परिवार चाहता है कि शुभम की वैवाहिक स्थिति को लेकर स्पष्टता लाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि शहीद जवानों के मुआवज़े से जुड़े मामलों में सत्यापन की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो।
हादसे में शहीद हुए थे शुभम कुमार
फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार उन पांच वायुसेना कर्मियों में शामिल थे, जिनकी 13 जून को असम के जोरहाट एयरबेस पर AN-32 विमान हादसे में मौत हो गई थी। भारतीय वायुसेना ने हादसे की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दिए हैं। शुभम बिहार के जहानाबाद जिले के रहने वाले थे और परिवार के लिए एकमात्र कमाने वाले सदस्य बताए गए थे।
क्या है पूरा विवाद?
इस मामले में अभी तक आधिकारिक तौर पर सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जो रिपोर्ट्स सामने आई हैं, उनके मुताबिक विवाद का केंद्र वैवाहिक स्थिति, मुआवज़े की पात्रता और परिवार की जानकारी/सहमति है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि परिवार को शुभम की कोर्ट मैरिज की जानकारी नहीं थी, जबकि संबंधित महिला को पत्नी मानकर सहायता राशि दी गई।
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