तमिलनाडु विधानसभा में विजय का DMK पर बड़ा हमला, बोले ‘जनता का पैसा पार्टी फंड में डाला गया’
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में DMK पर सरकारी विभागों से धन निकालकर ‘पार्टी फंड’ में डालने का आरोप लगाया। उनके इस बयान के बाद सदन में भारी हंगामा हुआ, विपक्ष ने सबूत की मांग की और बाद में DMK विधायकों ने वॉकआउट कर दिया।
By Payal SinghPublished 23 Jun 2026, 06:46 PMUpdated 27 Jul 2026, 09:29 PM5 min read7 views
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में DMK पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
विजय ने कहा कि सरकारी विभागों से पैसा निकालकर उसे ‘पार्टी फंड’ में डाला गया।
आरोपों के बाद उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री से सदन में सबूत पेश करने की मांग की।
विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को भाषण जारी रखने की अनुमति दी।
हंगामे के बाद DMK विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विजय ने कहा कि TVK सरकार भ्रष्टाचार को संरक्षण नहीं देगी और कथित गबन की रकम वापस लाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार DMK की दया पर नहीं, बल्कि जनता के समर्थन पर चल रही है।
विधानसभा के बाहर उदयनिधि ने कहा कि अगर आरोप गंभीर हैं तो मुख्यमंत्री को औपचारिक प्रमाण पेश करने चाहिए।
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Quick Summary
तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय का यह भाषण केवल राजनीतिक हमला नहीं, बल्कि राज्य की मौजूदा सत्ता और पूर्व सत्ताधारी DMK के बीच बढ़ते टकराव का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था। सार्वजनिक धन को पार्टी फंड में डाले जाने का आरोप बेहद गंभीर है, क्योंकि यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि संस्थागत भ्रष्टाचार के आरोप की श्रेणी में आता है। ऐसे आरोपों का असर विधानसभा की बहस से आगे जाकर प्रशासनिक विश्वसनीयता और राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी पड़ता है। दूसरी ओर, DMK की ओर से सबूत की मांग यह संकेत देती है कि विपक्ष इस लड़ाई को केवल राजनीतिक मंच पर नहीं छोड़ना चाहता, बल्कि मुख्यमंत्री के दावों को तथ्यात्मक कसौटी पर कसना चाहता है। अगर सरकार इन आरोपों को दस्तावेज़ों, जांच या औपचारिक कार्रवाई के जरिए आगे बढ़ाती है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा मोड़ बन सकता है। लेकिन यदि आरोप सिर्फ भाषण तक सीमित रहते हैं, तो यह मामला विधानसभा की तीखी नोकझोंक तक सिमट सकता है।
तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को उस समय भारी राजनीतिक टकराव देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विपक्षी DMK पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब के दौरान विजय ने कहा कि पिछली सरकार के समय सरकारी विभागों से धन निकालकर उसे पार्टी फंड में डाला गया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में विपक्षी बेंचों से तीखी प्रतिक्रिया हुई और कार्यवाही कुछ समय के लिए हंगामे की भेंट चढ़ गई।
विजय का DMK पर सीधा आरोप
अपने संबोधन में विजय ने कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर काम करेगी और किसी को भी सरकारी खजाने को निजी या राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं करने देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती शासनकाल में सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हुआ और सार्वजनिक धन को पार्टी हितों के लिए मोड़ा गया। विजय ने कहा कि उनकी सरकार ऐसे सभी मामलों की समीक्षा करेगी और जो भी पैसा कथित तौर पर गलत तरीके से लिया गया है, उसे वापस लाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चाहे मामला पिछली सरकार के समय का हो, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सदन में हंगामा, उदयनिधि ने मांगा सबूत
मुख्यमंत्री के इन आरोपों पर विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सदन में खड़े होकर मुख्यमंत्री से पूछा कि अगर उनके पास भ्रष्टाचार के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सामग्री है, तो उसे सदन के पटल पर रखा जाए। उदयनिधि की आपत्ति के बाद विधानसभा में शोर-शराबा बढ़ गया। विपक्षी सदस्यों ने मुख्यमंत्री के बयान को निराधार बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने हस्तक्षेप किया और कहा कि मुख्यमंत्री को अपना भाषण पूरा करने दिया जाए। अध्यक्ष के इस रुख से नाराज़ होकर DMK सदस्यों ने अंततः सदन से वॉकआउट कर दिया।
विजय ने TVK सरकार की स्थिति भी स्पष्ट की
हंगामे के बाद अपना भाषण फिर शुरू करते हुए विजय ने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया कि उनकी सरकार किसी अन्य दल की राजनीतिक कृपा पर टिकी है। उन्होंने कहा कि TVK सरकार जनता के जनादेश पर बनी है, न कि DMK के समर्थन पर। विजय ने कहा कि उनकी पार्टी न तो भ्रष्टाचार में शामिल होगी और न ही किसी को जनता के पैसे की लूट की छूट देगी। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी सरकार खुद को पिछले शासन से अलग, एक “साफ-सुथरे प्रशासन” के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है।
स्टालिन की नकल कर कसा तंज
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विजय ने कथित तौर पर एम.के. स्टालिन की शैली की नकल करते हुए भी विपक्ष पर तंज कसा। इस नाटकीय अंदाज़ ने सदन के माहौल को और गर्म कर दिया। राजनीतिक रूप से यह कदम सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि विपक्ष को सार्वजनिक रूप से चुनौती देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। तमिलनाडु की राजनीति में व्यक्तिगत और प्रतीकात्मक हमले अक्सर बड़े राजनीतिक संदेश देते हैं, और विजय की यह शैली भी उसी दिशा में देखी जा रही है।
विधानसभा के बाहर उदयनिधि का पलटवार
सदन से बाहर निकलने के बाद उदयनिधि स्टालिन ने पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री के पास वास्तव में भ्रष्टाचार के ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें औपचारिक रूप से सदन या जांच एजेंसियों के सामने रखा जाना चाहिए। उदयनिधि ने यह भी संकेत दिया कि केवल राजनीतिक भाषणों में आरोप लगाने से बात नहीं बनेगी। उनका कहना था कि सरकार को अगर सचमुच कोई गड़बड़ी मिली है, तो उसे जांच, दस्तावेज़ और कार्रवाई के जरिए साबित करना चाहिए।
क्यों अहम है यह टकराव?
1. विधानसभा में भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप
किसी विपक्षी दल पर यह आरोप लगाना कि उसने सरकारी धन को पार्टी फंड में बदला, साधारण राजनीतिक टिप्पणी नहीं है। यह सीधे-सीधे वित्तीय दुरुपयोग और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप है।
2. TVK बनाम DMK की नई राजनीतिक रेखा
विजय की पार्टी खुद को तमिलनाडु की राजनीति में एक नए विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है। ऐसे में DMK पर सीधा हमला उनके राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा भी माना जा सकता है।
3. सदन के भीतर और बाहर संघर्ष
इस घटना से साफ है कि आने वाले समय में तमिलनाडु विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है, खासकर भ्रष्टाचार, प्रशासनिक जवाबदेही और पिछली सरकार के फैसलों को लेकर।
आगे क्या?
अब इस पूरे विवाद का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि मुख्यमंत्री विजय अपने आरोपों को केवल राजनीतिक बयान तक सीमित रखते हैं या फिर किसी औपचारिक जांच, दस्तावेजी खुलासे या कानूनी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ते हैं। अगर सरकार इन आरोपों को ठोस साक्ष्यों के साथ आगे बढ़ाती है, तो यह DMK के लिए बड़ी राजनीतिक और कानूनी चुनौती बन सकता है। लेकिन अगर प्रमाण सार्वजनिक नहीं किए जाते, तो विपक्ष इसे सरकार की राजनीतिक बयानबाजी करार देकर पलटवार जारी रखेगा।
तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय और DMK के बीच हुआ यह टकराव राज्य की राजनीति में बढ़ती ध्रुवीकरण की तस्वीर पेश करता है। विजय ने जहां खुद को भ्रष्टाचार विरोधी नेतृत्व के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की, वहीं DMK ने आरोपों को चुनौती देकर सबूत की मांग की। फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस के केंद्र में है, लेकिन इसका असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार अपने आरोपों को किस हद तक तथ्यों और कार्रवाई के साथ आगे बढ़ाती है।
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