केरल बीजेपी में विधानसभा चुनाव के बाद चुनावी फंड के इस्तेमाल को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी की आंतरिक जांच और ऑडिट के दौरान चुनाव प्रचार के लिए आवंटित धन के इस्तेमाल में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पार्टी की केंद्रीय ऑडिट प्रक्रिया के दौरान राज्य इकाई चुनाव संबंधी काम के लिए मिले 80 करोड़ रुपये से अधिक के खर्च का संतोषजनक हिसाब नहीं दे सकी। इसके बाद कुछ राज्य और जिला स्तर के पदाधिकारी जांच के दायरे में आ गए।
नेताओं की वित्तीय गतिविधियों पर उठे सवाल
मामले ने उस समय अधिक तूल पकड़ा जब कुछ पार्टी पदाधिकारियों द्वारा चुनाव के तुरंत बाद पुराने बैंक लोन चुकाने, महंगी गाड़ियां खरीदने और रियल एस्टेट में निवेश करने के आरोप सामने आए। पार्टी से जुड़े कुछ लोगों ने इन गतिविधियों को लेकर शिकायत की, जिसके बाद चुनावी फंड के इस्तेमाल की जांच और खातों की विस्तृत समीक्षा शुरू की गई।
फर्जी बिल और प्रचार खर्च में गड़बड़ी के आरोप
रिपोर्ट्स में चुनाव प्रचार सामग्री, झंडों और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर कथित फर्जी बिलिंग के आरोप भी लगाए गए हैं। दावा है कि कुछ ठेकों और भुगतान में अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान किराए पर लिए गए वाहनों और हेलीकॉप्टर सेवाओं के बिलों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कागजों पर दिखाए गए कुछ वाहन वास्तव में प्रचार अभियान में इस्तेमाल नहीं हुए। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
तीन पदाधिकारियों पर कार्रवाई की खबर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कथित फंड अनियमितताओं के आरोपों के बीच तीन पार्टी सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। इनमें एक राज्य सचिव समेत अन्य पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। पार्टी ने मामले की जांच के लिए वरिष्ठ नेता कुम्मनम राजशेखरन के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति गठित किए जाने की भी खबर है।
राजीव चंद्रशेखर ने आरोपों से किया इनकार
केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने पार्टी में वित्तीय हेराफेरी के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पार्टी के खिलाफ प्रसारित कथित फर्जी खबरों को लेकर सतर्क रहने को कहा। उनका कहना है कि पार्टी में विभिन्न स्तरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई एक आंतरिक संगठनात्मक प्रक्रिया है और इसे वित्तीय घोटाले के रूप में पेश करना गलत है।
पुलिस तक पहुंचा फर्जी बिल का आरोप
इस बीच, तिरुवनंतपुरम जिले से जुड़े एक स्थानीय बीजेपी नेता द्वारा पुलिस में शिकायत किए जाने की भी खबर है। आरोप है कि उनके परिवार के व्यवसाय के जीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर का कथित तौर पर बिना अनुमति इस्तेमाल कर चुनावी सामग्री की आपूर्ति से जुड़े बिल तैयार किए गए।पुलिस शिकायत और पार्टी की आंतरिक जांच के बाद चुनावी फंड विवाद ने केरल की राजनीति में नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है। पार्टी नेतृत्व ने विस्तृत ऑडिट शुरू किया है, जबकि विपक्ष पूरे मामले की स्वतंत्र पुलिस जांच की मांग कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक सीमा और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।







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