लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दर्शाने वाले एक पोस्टर को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान यह पोस्टर सामने आया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।
वाराणसी में पोस्टर और दुग्धाभिषेक से बढ़ा विवाद
राहुल गांधी के 56वें जन्मदिन के मौके पर वाराणसी में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका एक पोस्टर लगाया, जिसमें उन्हें भगवान परशुराम के रूप में दिखाया गया था। पोस्टर में राहुल गांधी के एक हाथ में भगवान परशुराम से जुड़ी कुल्हाड़ी और दूसरे हाथ में भारतीय संविधान दिखाया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने पोस्टर पर दुग्धाभिषेक भी किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
भाजपा ने कहा- हिंदू आस्था का घोर अपमान
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की तुलना भगवान परशुराम से करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह हिंदू धर्म, परंपरा और आस्था का घोर अपमान है। मालवीय ने कहा कि भगवान परशुराम हिंदू मान्यताओं में साहस, अनुशासन, त्याग और धर्म के प्रतीक माने जाते हैं, इसलिए उनकी तुलना किसी समकालीन राजनीतिक नेता से करना करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को आहत करता है।
कांग्रेस पर धार्मिक प्रतीकों के दुरुपयोग का आरोप
अमित मालवीय ने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू प्रतीकों के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस अन्य धर्मों के पवित्र प्रतीकों के साथ भी ऐसी तुलना करने की हिम्मत करेगी, या फिर यह अनादर सिर्फ हिंदू प्रतीकों तक ही सीमित है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस बार-बार अपने राजनीतिक संदेश को मजबूत करने के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करती है।
जन्मदिन के मौके पर मिला शुभकामनाओं का संदेश
यह विवाद उस समय सामने आया जब राहुल गांधी के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। हालांकि, वाराणसी में हुए इस कार्यक्रम ने जन्मदिन की राजनीतिक और प्रतीकात्मक चर्चा को नया मोड़ दे दिया।
राजनीतिक बहस का नया केंद्र
राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाने और पोस्टर पर दुग्धाभिषेक करने की घटना ने कांग्रेस और भाजपा के बीच एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। भाजपा इसे हिंदू आस्था के अपमान के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से इस पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श में और गर्मा सकता है।







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