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‘कुछ लोग सिर्फ राजनीतिक लाभ देख रहे हैं’: मोदी की तारीफ पर उठे विवाद के बीच शशि थरूर का पलटवार

कांग्रेस के भीतर बढ़े विवाद पर तिरुवनंतपुरम सांसद का जवाब, बोले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर मेरी चिंता को राजनीतिक चश्मे से न देखा जाए।

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‘कुछ लोग सिर्फ राजनीतिक लाभ देख रहे हैं’: मोदी की तारीफ पर उठे विवाद के बीच शशि थरूर का पलटवार

खबर के मुख्य बिंदु

  • शशि थरूर ने मोदी की जी7 बैठक में की गई टिप्पणी का सार्वजनिक समर्थन किया था।
  • इसके बाद कांग्रेस के भीतर उनकी आलोचना शुरू हो गई।
  • पवन खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा था कि थरूर ने वो बातें सुन लीं जो प्रधानमंत्री ने कही ही नहीं।
  • थरूर ने जवाब में कहा कि कुछ लोग भारतीयों की सुरक्षा से ज्यादा राजनीतिक फायदा देखने में लगे हैं।
  • उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का फोकस युद्ध के दौरान नागरिक नाविकों की सुरक्षा था।
  • थरूर ने अपने पक्ष में मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक सूचनाओं का हवाला भी दिया।
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Quick Summary

कांग्रेस सांसद शशि थरूर और उनकी पार्टी के बीच एक बार फिर सार्वजनिक मतभेद सामने आ गए हैं। इस बार मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति या बयानबाज़ी पर नहीं, बल्कि उस पर थरूर की सकारात्मक प्रतिक्रिया को लेकर है। जी7 शिखर सम्मेलन में मोदी द्वारा भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाए जाने की बात पर थरूर ने समर्थन जताया, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसे पार्टी लाइन से अलग रुख माना। अब थरूर ने साफ कर दिया है कि उनका मकसद किसी राजनीतिक व्यक्ति की प्रशंसा करना नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे को गंभीरता से रखना था। उनके बयान से यह भी साफ होता है कि कांग्रेस के भीतर विदेश नीति और राष्ट्रीय हित जैसे मुद्दों पर एकरूपता की कमी अब खुलकर दिखने लगी है।

तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बातचीत पर की गई अपनी टिप्पणी को लेकर उठे विवाद पर पलटवार किया है। पार्टी के भीतर आलोचना झेल रहे थरूर ने कहा कि उनकी चिंता केवल भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर थी, लेकिन कुछ लोग इस मुद्दे पर भी राजनीतिक लाभ तलाशने में लगे हैं।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के साथ अपनी सार्वजनिक और निजी दोनों बैठकों में भारत की ओर से समुद्री सुरक्षा और नागरिक नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा स्पष्ट रूप से उठाया था। उनके इस बयान को भाजपा ने मोदी की कूटनीति की तारीफ के रूप में पेश किया, जबकि कांग्रेस के भीतर कुछ नेताओं ने इस पर असहमति जताई।

थरूर ने क्या कहा?
शशि थरूर ने कहा कि युद्ध या संघर्ष की स्थिति में वाणिज्यिक जहाजों पर काम कर रहे नागरिक नाविकों को किसी भी हालत में लड़ाकू मानकर निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य इसी सिद्धांत को रेखांकित करना था।

थरूर ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा
“तीन भारतीयों ने अपनी जान गंवाई। मेरी टिप्पणी हमारे नागरिकों की सुरक्षा और इस सिद्धांत के बारे में थी कि नागरिक नाविकों को कभी भी सैन्य कार्रवाई का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। अगर कुछ लोग इस चिंता को दूर करने की बजाय राजनीतिक लाभ उठाने में अधिक रुचि रखते हैं, तो यह मेरे बारे में कम और उनके बारे में अधिक बताता है।”

पवन खेड़ा ने साधा था निशाना
थरूर के बयान के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उन पर कटाक्ष किया था। खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि थरूर ने ऐसी बातें सुन लीं, जो प्रधानमंत्री मोदी ने कही ही नहीं। उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की कि थरूर प्रधानमंत्री की कूटनीति की जरूरत से ज्यादा सराहना कर रहे हैं और सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड से परे बातें कर रहे हैं। खेड़ा की टिप्पणी ने कांग्रेस के भीतर इस विवाद को और हवा दे दी। पार्टी के कुछ नेताओं को लगा कि थरूर का बयान भाजपा को राजनीतिक हमला करने का मौका दे रहा है, जबकि थरूर का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और भारतीय नागरिकों के जीवन का सवाल दलीय राजनीति से ऊपर होना चाहिए।

मोदी-ट्रंप मुलाकात से जुड़ा है मामला
यह पूरा विवाद जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात से जुड़ा है। कांग्रेस ने पहले आरोप लगाया था कि ओमान की खाड़ी में एक व्यापारिक पोत पर अमेरिकी हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों के मुद्दे पर मोदी ने पर्याप्त सख्ती नहीं दिखाई। इसके उलट, शशि थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपनी बातचीत में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। थरूर के मुताबिक, यह संदेश देना जरूरी था कि युद्ध के दौरान वाणिज्यिक जहाजों पर तैनात नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

अपने बचाव में रिपोर्ट्स का हवाला
आलोचना के बाद थरूर ने अपने बचाव में मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक सूचनाओं का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि वह तथ्यों को पढ़कर और समझकर बोलते हैं, और उनके जीवन में कभी उन पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप नहीं लगा। उन्होंने यह भी जताने की कोशिश की कि उनका बयान किसी व्यक्ति-विशेष की प्रशंसा नहीं था, बल्कि एक नीतिगत और मानवीय चिंता पर आधारित था। उनके मुताबिक, अगर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का सवाल है तो उस पर समर्थन या चिंता व्यक्त करना किसी पार्टी लाइन से बंधा नहीं होना चाहिए।

कांग्रेस के भीतर मतभेद फिर उजागर
यह पहला मौका नहीं है जब शशि थरूर का रुख कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग दिखाई दिया हो। विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति जैसे मुद्दों पर थरूर अक्सर अपेक्षाकृत स्वतंत्र राय रखते रहे हैं। यही वजह है कि उनके बयान कई बार पार्टी के भीतर असहजता पैदा करते हैं। इस ताज़ा विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कांग्रेस के भीतर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सार्वजनिक संदेश की एकरूपता चुनौती बनी हुई है। दूसरी ओर, भाजपा ऐसे मौकों का इस्तेमाल कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों को उजागर करने के लिए कर रही है।

राजनीतिक बयान से ज्यादा ‘सुरक्षा’ पर जोर
थरूर के जवाब का सबसे अहम हिस्सा यह है कि उन्होंने बहस को मोदी बनाम कांग्रेस के दायरे से निकालकर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के केंद्र में रखने की कोशिश की। उनका कहना है कि तीन भारतीयों की मौत का मुद्दा राजनीतिक स्कोरिंग का विषय नहीं होना चाहिए।
इसलिए थरूर का ताजा बयान केवल आलोचना का जवाब नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि कुछ मुद्दों पर राष्ट्रहित और मानवीय चिंता को पार्टी राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाता है और क्या यह मामला पार्टी के भीतर और बहस को जन्म देता है।
Payal Singh

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