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तमिलनाडु की सी-फूड फैक्ट्री में अमोनिया गैस रिसाव, 7 श्रमिकों की मौत; कई की हालत गंभीर

तिरुवल्लूर जिले के पेरियापलायम के पास निजी समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई में रविवार को हुआ बड़ा हादसा; 67 श्रमिक प्रभावित, कई अस्पतालों में भर्ती।

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तमिलनाडु की सी-फूड फैक्ट्री में अमोनिया गैस रिसाव, 7 श्रमिकों की मौत; कई की हालत गंभीर

खबर के मुख्य बिंदु

  • हादसा तिरुवल्लूर जिले के पेरियापलायम के पास स्थित फैक्ट्री में हुआ।
  • फैक्ट्री एक निजी समुद्री खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात इकाई बताई जा रही है।
  • अमोनिया गैस रिसाव की आशंका जताई गई है।
  • घटना में 7 श्रमिकों की मौत हो गई।
  • 67 श्रमिक प्रभावित हुए, जिनमें से कई को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
  • प्रभावितों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और महिला कर्मचारी शामिल हैं।
  • एनडीआरएफ, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं।
  • रिसाव के कारण और सुरक्षा मानकों की जांच शुरू कर दी गई है।
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Quick Summary

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर में हुआ यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की गंभीर खामियों को उजागर करता है। अमोनिया जैसी जहरीली गैस का उपयोग खाद्य प्रसंस्करण और कोल्ड स्टोरेज प्रणालियों में आम है, लेकिन यदि सुरक्षा प्रोटोकॉल में थोड़ी भी चूक हो जाए तो परिणाम जानलेवा हो सकते हैं। इस मामले में कई श्रमिकों की मौत और दर्जनों के अस्पताल पहुंचने से साफ है कि रिसाव का असर बेहद गंभीर था। यह घटना केवल एक फैक्ट्री हादसा नहीं, बल्कि श्रमिक सुरक्षा, प्रवासी मजदूरों की कार्य-स्थितियों और औद्योगिक निगरानी तंत्र पर भी बड़ा सवाल है। खासकर तब, जब कई श्रमिक फैक्ट्री परिसर के भीतर ही बने आवास में रह रहे थे। अब सबसे अहम सवाल यही है कि क्या प्लांट में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था, और अगर नहीं, तो इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है।

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में रविवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जहां पेरियापलायम के पास स्थित एक निजी समुद्री खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात इकाई में संदिग्ध अमोनिया गैस रिसाव हो गया। इस दुर्घटना में 7 श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में अन्य मजदूर बीमार पड़ गए। अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित श्रमिकों को तत्काल अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना कन्निगैपैर गांव में स्थित फैक्ट्री परिसर में हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, रिसाव के बाद जहरीली गैस पूरे परिसर में तेजी से फैल गई, जिससे वहां काम कर रहे और रहने वाले श्रमिकों में अफरा-तफरी मच गई।

प्रवासी श्रमिक और महिलाएं भी चपेट में
अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित श्रमिकों में बड़ी संख्या प्रवासी मजदूरों की है, जिनमें महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई मजदूर फैक्ट्री परिसर के भीतर उपलब्ध कराए गए आवास में ही रहते थे। गैस फैलते ही कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत, घबराहट और बेहोशी जैसी शिकायतें होने लगीं। कुछ श्रमिकों के नाक और मुंह से खून आने की भी खबर सामने आई है, जिससे रिसाव की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

67 श्रमिक प्रभावित, कई अस्पताल में भर्ती
प्रशासन के अनुसार, इस हादसे में कुल 67 श्रमिक प्रभावित हुए। इनमें से कई को तुरंत पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 7 श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य का इलाज अभी भी जारी है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, कुछ मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है और उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया है।

राहत-बचाव के लिए एनडीआरएफ और प्रशासन सक्रिय
हादसे की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। प्रभावित क्षेत्र को घेरकर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। प्रशासन ने फैक्ट्री परिसर और आसपास के इलाके की स्थिति का आकलन करते हुए सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक कदम उठाए। साथ ही, गैस के प्रभाव को नियंत्रित करने और अन्य श्रमिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम भी किया गया।

अमोनिया गैस रिसाव की आशंका
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प्रारंभिक जांच में अमोनिया गैस रिसाव की आशंका जताई गई है। समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और कोल्ड स्टोरेज प्रणालियों में अमोनिया का इस्तेमाल आमतौर पर रेफ्रिजरेशन सिस्टम में किया जाता है। हालांकि, यह गैस अत्यधिक जहरीली मानी जाती है और अधिक मात्रा में रिसाव होने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है। फिलहाल अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि रिसाव आखिर किस तकनीकी खराबी, लापरवाही या सिस्टम फेलियर की वजह से हुआ।

सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
इस घटना ने तमिलनाडु के सी-फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। औद्योगिक इकाइयों में खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल के बावजूद अगर पर्याप्त निगरानी, अलार्म सिस्टम, गैस डिटेक्शन और इमरजेंसी निकासी व्यवस्था नहीं हो, तो ऐसे हादसे बड़े जनहानि का कारण बन सकते हैं। अब प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि संबंधित फैक्ट्री में सुरक्षा प्रोटोकॉल, गैस हैंडलिंग नियम, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और वर्कर सेफ्टी मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

जांच के आदेश
जिला प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि फैक्ट्री प्रबंधन ने श्रमिकों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से इंतजाम किए थे, गैस रिसाव को रोकने के लिए कौन-सी तकनीकी व्यवस्था मौजूद थी और हादसे के बाद तत्काल प्रतिक्रिया कितनी प्रभावी रही। साथ ही, प्रशासन प्रभावित श्रमिकों के इलाज, उनके परिवारों की सहायता और पर्यावरणीय प्रभावों का भी आकलन कर रहा है।

औद्योगिक लापरवाही पर फिर बहस
तिरुवल्लूर की यह त्रासदी सिर्फ एक स्थानीय हादसा नहीं, बल्कि पूरे देश में औद्योगिक सुरक्षा के मुद्दे को फिर से केंद्र में ले आई है। फैक्ट्री और प्रोसेसिंग इकाइयों में काम करने वाले श्रमिक अक्सर सीमित संसाधनों, लंबे कार्यघंटों और कमजोर सुरक्षा ढांचे के बीच काम करते हैं।
ऐसे में यह हादसा इस बात की चेतावनी है कि उद्योगों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सीधे मजदूरों की जान पर भारी पड़ सकती है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

Payal Singh

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