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मुंबई में 1,080 पेड़ों की कटाई-स्थानांतरण को मंजूरी, हाईवे विस्तार और रीडेवलपमेंट परियोजनाओं का रास्ता साफ

ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे एलिवेटेड कॉरिडोर, गोरेगांव के मोतीलाल नगर और बांद्रा की पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए पेड़ों को हटाने का फैसला; विपक्ष ने पर्यावरणीय नुकसान पर उठाए सवाल।

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मुंबई में 1,080 पेड़ों की कटाई-स्थानांतरण को मंजूरी, हाईवे विस्तार और रीडेवलपमेंट परियोजनाओं का रास्ता साफ

खबर के मुख्य बिंदु

  • मुंबई वृक्ष प्राधिकरण ने 1,080 पेड़ों को प्रभावित करने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी।
  • ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे परियोजना के लिए 621 पेड़ प्रभावित होंगे।
  • इनमें 218 पेड़ काटे जाएंगे और 403 पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
  • गोरेगांव के मोतीलाल नगर पुनर्विकास के लिए 220 पेड़ों पर असर पड़ेगा।
  • बांद्रा की पुनर्विकास परियोजनाओं से 239 पेड़ प्रभावित होंगे।
  • विपक्ष ने कहा कि यह फैसला शहर के हरित संतुलन पर गंभीर असर डाल सकता है।
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Quick Summary

मुंबई में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। मुंबई वृक्ष प्राधिकरण ने शहर की तीन बड़ी परियोजनाओं—एक एलिवेटेड हाईवे कॉरिडोर और दो रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए 1,080 पेड़ों को हटाने या स्थानांतरित करने की मंजूरी दे दी है। प्रशासन का दावा है कि यह फैसला शहर की ट्रैफिक समस्या और शहरी ढांचे को मजबूत करने के लिए जरूरी है, लेकिन विपक्ष और पर्यावरण से जुड़े लोग इसे मुंबई के हरित आवरण पर एक और बड़ा हमला मान रहे हैं। इस फैसले का सबसे बड़ा असर ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के किनारे दिखेगा, जहां सैकड़ों पेड़ प्रभावित होंगे। वहीं, मोतीलाल नगर और बांद्रा की परियोजनाएं भी अब तेजी से आगे बढ़ सकेंगी। सवाल यही है कि क्या विकास के नाम पर शहर की हरियाली की कीमत चुकाई जा रही है?

मुंबई में शहरी विकास की तीन बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए मुंबई वृक्ष प्राधिकरण ने कुल 1,080 पेड़ों को हटाने, काटने और स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन इसके साथ ही पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर नई बहस भी छिड़ गई है। इस मंजूरी का सबसे बड़ा हिस्सा ठाणे के छेड़ा नगर और आनंद नगर को जोड़ने वाले एलिवेटेड हाईवे कॉरिडोर से जुड़ा है। इसके अलावा गोरेगांव के मोतीलाल नगर पुनर्विकास और बांद्रा की पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए भी पेड़ों को हटाने की स्वीकृति दी गई है।

ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे परियोजना से सबसे ज्यादा असर
प्राधिकरण के फैसले के अनुसार, ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के किनारे स्थित कुल 621 पेड़ इस परियोजना से प्रभावित होंगे। इनमें से 218 पेड़ों को काटा जाएगा, जबकि 403 पेड़ों को दूसरी जगह प्रत्यारोपित (ट्रांसप्लांट) किया जाएगा। यह परियोजना मुंबई और ठाणे के बीच यात्रा समय कम करने और ट्रैफिक दबाव घटाने के लिए प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर का हिस्सा है। प्रशासन का कहना है कि यह कॉरिडोर लंबे समय में लाखों दैनिक यात्रियों को राहत देगा और शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा।

गोरेगांव और बांद्रा की परियोजनाएं भी शामिल
हाईवे परियोजना के अलावा, गोरेगांव स्थित मोतीलाल नगर पुनर्विकास परियोजना के लिए भी 220 पेड़ों को हटाने की मंजूरी दी गई है। इनमें 89 पेड़ काटे जाएंगे, जबकि 131 पेड़ों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा। वहीं, बांद्रा की पुनर्विकास परियोजनाओं के चलते 239 पेड़ों पर असर पड़ेगा। इन परियोजनाओं का मकसद पुराने शहरी इलाकों को आधुनिक सुविधाओं के साथ दोबारा विकसित करना है, लेकिन इसके लिए हरित क्षेत्र में कटौती का रास्ता भी खुल गया है।

विपक्ष ने उठाए पर्यावरणीय सवाल
इस फैसले का शिवसेना (यूबीटी) और अन्य विपक्षी दलों ने विरोध किया है। विपक्ष का कहना है कि मुंबई जैसे पहले से घने और प्रदूषणग्रस्त शहर में सैकड़ों पेड़ों को हटाना गंभीर पर्यावरणीय नुकसान का कारण बन सकता है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता किशोरी पेडणेकर ने कहा कि ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के किनारे पेड़ों को हटाने के प्रस्ताव का उनकी पार्टी ने कड़ा विरोध किया। उनका सवाल था कि जब पेड़ों को बचाने के विकल्प मौजूद हैं, तो बड़ी संख्या में कटाई की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने यह भी पूछा कि कटे हुए पेड़ों की लकड़ी का उपयोग और निपटान किस तरह किया जाएगा।
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सत्ताधारी पक्ष ने किया बचाव
दूसरी ओर, सत्ताधारी पक्ष ने इस फैसले का बचाव किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि परियोजनाओं के डिजाइन और निष्पादन में पर्यावरणीय नुकसान को कम करने की कोशिश की गई है। उनका तर्क है कि जहां संभव है, वहां पेड़ों को काटने की बजाय ट्रांसप्लांट किया जाएगा। सत्ताधारी पक्ष का यह भी कहना है कि मुंबई की बढ़ती आबादी, ट्रैफिक और आवासीय जरूरतों को देखते हुए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को रोका नहीं जा सकता। उनके मुताबिक, एलिवेटेड हाईवे और रीडेवलपमेंट योजनाएं लंबे समय में शहर के लिए फायदेमंद साबित होंगी।

विकास बनाम हरियाली की पुरानी बहस फिर तेज
मुंबई में यह पहला मौका नहीं है जब किसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई का मुद्दा सामने आया हो। मेट्रो, फ्लाईओवर, कोस्टल रोड और रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के दौरान भी इसी तरह के विवाद उठते रहे हैं। हर बार प्रशासन विकास और कनेक्टिविटी का तर्क देता है, जबकि पर्यावरणविद शहर की घटती हरियाली, बढ़ते तापमान और बाढ़ जैसे जोखिमों की चेतावनी देते हैं। इस ताजा फैसले ने एक बार फिर यही सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मुंबई का विकास उसके हरित आवरण की कीमत पर हो रहा है?

आगे क्या?
अब मंजूरी मिलने के बाद संबंधित एजेंसियां इन परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा सकेंगी। हालांकि, यह भी संभव है कि पर्यावरण समूह और विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सार्वजनिक अभियान या कानूनी चुनौती की राह अपनाएं। फिलहाल इतना तय है कि मुंबई के शहरी विकास की यह नई रफ्तार सड़क, आवास और ट्रैफिक राहत तो ला सकती है, लेकिन इसकी पर्यावरणीय कीमत कितनी बड़ी होगी, इस पर बहस अभी खत्म नहीं हुई है।
Payal Singh

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