राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमा में बदलाव को लेकर हरियाणा सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के पांच जिलों—Karnal, Jind, Mahendragarh, Bhiwani और Charkhi Dadri—को NCR से बाहर करने के प्रस्ताव पर 16 जून को होने वाली NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में चर्चा की जाएगी।
NCR यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का गठन दिल्ली पर बढ़ते जनसंख्या दबाव और शहरीकरण को संतुलित करने के उद्देश्य से किया गया था। वर्ष 1985 में National Capital Region Planning Board का गठन किया गया, ताकि दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों का योजनाबद्ध विकास किया जा सके। वर्तमान में NCR में दिल्ली के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुल 24 जिले शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक 14 जिले हरियाणा के हैं।
हरियाणा सरकार का मानना है कि दिल्ली से काफी दूर स्थित कुछ जिलों को NCR में शामिल रखने से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। इसके विपरीत, NGT और GRAP जैसे पर्यावरणीय नियमों के कारण उद्योगों, व्यापारियों और किसानों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरकार का तर्क है कि जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी जैसे जिलों में औद्योगिक निवेश और विकास की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं। पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध जैसे नियम स्थानीय व्यापार और परिवहन व्यवस्था पर भी असर डालते हैं।
यह प्रस्ताव पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री Manohar Lal Khattar की पहल से जुड़ा बताया जा रहा है। रीजनल प्लान-2041 के तहत NCR की सीमा को नए सिरे से निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार NCR की सीमा दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित की जा सकती है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो हरियाणा का NCR क्षेत्र लगभग 25 हजार वर्ग किलोमीटर से घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर रह जाएगा।
अब सभी की नजरें 16 जून को होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जहां इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।







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