ओडिशा के Jagannath Temple ने अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंदिर प्रशासन को कई पवित्र शब्दों और प्रतीकों के लिए ट्रेडमार्क संरक्षण प्राप्त हुआ है, जिससे यह ऐसा करने वाला भारत का पहला मंदिर बन गया है। मंदिर प्रशासन को "पतितपबाना" और "आनंद बाजार" जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक शब्दों के लिए वर्डमार्क संरक्षण मिला है। इसके अलावा मंदिर के मुख्य शिखर पर स्थापित पवित्र प्रतीक "नीलाचक्र" को लोगोमार्क के रूप में संरक्षित किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार मंदिर प्रशासन ने जगन्नाथ संस्कृति और मंदिर परंपरा से जुड़े 26 अन्य नामों, वाक्यांशों और प्रतीकों के लिए भी आवेदन किया है। इनमें "श्रीमंदिर", "जगन्नाथ धाम", "श्रीक्षेत्र", "बड़ा दंड" और "महाप्रसाद" जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। यह कदम हाल के वर्षों में धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े नामों के उपयोग को लेकर उठे विवादों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इन पवित्र शब्दों और प्रतीकों का अनधिकृत या व्यावसायिक उपयोग श्रद्धालुओं को भ्रमित कर सकता है और मंदिर की ऐतिहासिक पहचान को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह संरक्षण पेटेंट नहीं बल्कि ट्रेडमार्क के रूप में दिया गया है। वर्डमार्क किसी विशेष शब्द या वाक्यांश की कानूनी सुरक्षा करता है, जबकि लोगोमार्क किसी प्रतीक, चिन्ह या डिज़ाइन को संरक्षण प्रदान करता है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि ट्रेडमार्क पंजीकरण से भविष्य में किसी भी अनधिकृत उपयोग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना आसान होगा। साथ ही यह पहल भगवान जगन्नाथ से जुड़ी धार्मिक परंपराओं और ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




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