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45 डिग्री की भीषण गर्मी और चारों ओर धधकती आग के बीच बाबा ने पूरी की 41 दिन की कठिन तपस्या

पंजाब के मलेरकोटला स्थित श्री चंद्र दरबार बड़ा डेरा उदासीन आश्रम में बाबा स्वामी रैंक मुनी जी ने ‘पंच धूणी साधना’ के तहत 41 दिनों तक अग्नि के बीच तप कर समाज कल्याण और विश्व शांति का संदेश दिया।

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45 डिग्री की भीषण गर्मी और चारों ओर धधकती आग के बीच बाबा ने पूरी की 41 दिन की कठिन तपस्या

खबर के मुख्य बिंदु

  • पंजाब के मलेरकोटला के गांव हिम्मताना में 41 दिनों तक चली पंच धूणी साधना।
  • बाबा स्वामी रैंक मुनी जी ने चारों ओर जलती धूनियों के बीच तपस्या की।
  • साधना का उद्देश्य विश्व शांति और जनकल्याण बताया गया।
  • समापन समारोह में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
  • युवाओं को नशामुक्त जीवन और अध्यात्म से जुड़ने का संदेश दिया गया।
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए श्रद्धालुओं में 500 पौधे वितरित किए गए।
  • पूरे क्षेत्र में यह साधना चर्चा का विषय बनी हुई है।
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Quick Summary

भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बीच की गई 41 दिवसीय पंच धूणी साधना ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। बाबा स्वामी रैंक मुनी जी ने इसे समाज, मानवता और विश्व कल्याण के लिए समर्पित बताया। धार्मिक आयोजन के साथ-साथ नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक संदेशों को भी प्रमुखता दी गई, जिससे यह आयोजन केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी बन गया।

पंजाब के मलेरकोटला जिले के गांव हिम्मताना स्थित श्री चंद्र दरबार बड़ा डेरा उदासीन आश्रम में एक अनोखी और कठिन साधना का समापन हुआ। आश्रम के प्रमुख बाबा स्वामी रैंक मुनी जी ने भीषण गर्मी के बीच 41 दिनों तक ‘पंच धूणी साधना’ कर श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर दिया।

जानकारी के अनुसार, जब क्षेत्र में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक था, तब बाबा स्वामी रैंक मुनी जी अपने चारों ओर जलती हुई धूनियों के बीच बैठकर लगातार भगवान के जप और तप में लीन रहे। इस दौरान उन्होंने तपस्या को समाज के कल्याण, विश्व शांति और मानवता की भलाई के लिए समर्पित बताया। साधना पूरी होने के बाद आश्रम में एक विशाल धार्मिक समागम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान गुरबाणी, कीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से लोगों को धर्म और संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया गया।

बाबा स्वामी रैंक मुनी जी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी को नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर अध्यात्म, सेवा और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को सही दिशा देना संतों और धार्मिक संस्थाओं का दायित्व है।
समागम के दौरान पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। आश्रम की ओर से श्रद्धालुओं में लगभग 500 पौधे वितरित किए गए और सभी को इन पौधों की देखभाल करने तथा हरित वातावरण बनाने का संकल्प दिलाया गया।

41 दिनों तक चली यह कठोर तपस्या पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। श्रद्धालु इसे आस्था, अनुशासन और अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक मान रहे हैं।
Payal Singh

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