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गूगल मैप्स की गलत लोकेशन से छूटी NEET-UG पुनर्परीक्षा, मुरादाबाद में कई छात्र समय पर केंद्र नहीं पहुंच पाए

अभिभावकों ने तकनीकी खराबी को जिम्मेदार ठहराया है। छात्रों का कहना है कि गूगल मैप्स ने उन्हें गलत परीक्षा केंद्र पर पहुंचा दिया, जिसके कारण वे रिपोर्टिंग समय के भीतर असली केंद्र तक नहीं पहुंच सके।

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गूगल मैप्स की गलत लोकेशन से छूटी NEET-UG पुनर्परीक्षा, मुरादाबाद में कई छात्र समय पर केंद्र नहीं पहुंच पाए

खबर के मुख्य बिंदु

  • मुरादाबाद में कई NEET-UG परीक्षार्थी पुनर्परीक्षा से चूक गए।
  • आरोप है कि गूगल मैप्स ने गलत परीक्षा केंद्र की लोकेशन दिखाई।
  • छात्र समय पर वास्तविक केंद्र तक नहीं पहुंच सके।
  • रिपोर्टिंग समय समाप्त होने के बाद उन्हें एग्जाम हॉल में प्रवेश नहीं दिया गया।
  • प्रभावित छात्रों में संभल के फैजान अली और सार्थक का नाम सामने आया है।
  • अभिभावकों ने इसे तकनीकी खराबी बताया और राहत की मांग की।
  • प्रशासन ने परिवारों से बातचीत की, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक राहत घोषित नहीं हुई है।
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Quick Summary

प्रतियोगी परीक्षाओं में एक-एक मिनट की अहमियत होती है, और ऐसे में किसी तकनीकी त्रुटि के कारण परीक्षा छूट जाना छात्रों के लिए बेहद गंभीर झटका है। मुरादाबाद की यह घटना सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि उस व्यापक बदलाव की ओर इशारा करती है जहां छात्र और परिवार यात्रा, लोकेशन और समय-प्रबंधन के लिए पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर होते जा रहे हैं। यदि परीक्षा केंद्र की लोकेशन गलत टैग की गई हो या नेविगेशन ऐप गलत दिशा दिखा दे, तो उसका सीधा असर छात्र के भविष्य पर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में परीक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे केवल एडमिट कार्ड जारी कर देने तक सीमित न रहें, बल्कि सत्यापित लोकेशन, हेल्पलाइन और वैकल्पिक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराएं।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में रविवार को आयोजित NEET-UG पुनर्परीक्षा के दौरान एक बड़ी तकनीकी समस्या सामने आई, जिसके कारण कई छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गए। प्रभावित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों का आरोप है कि गूगल मैप्स पर गलत लोकेशन दिखाई गई, जिसकी वजह से छात्र निर्धारित परीक्षा केंद्र की बजाय किसी अन्य स्थान पर पहुंच गए और फिर समय रहते वास्तविक केंद्र तक नहीं पहुंच सके।

क्या हुआ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभल के रहने वाले एक अभ्यर्थी फैजान अली ने अपने एडमिट कार्ड पर दिए गए परीक्षा केंद्र आरएन इंटर कॉलेज का पता खोजने के लिए गूगल मैप्स का इस्तेमाल किया। लेकिन नेविगेशन सेवा ने उन्हें कथित तौर पर गलत स्थान पर पहुंचा दिया। जब तक उन्हें असली केंद्र की जानकारी मिली और वे वहां पहुंचे, तब तक रिपोर्टिंग समय समाप्त हो चुका था। इसके बाद परीक्षा केंद्र प्रशासन ने उन्हें परीक्षा हॉल में प्रवेश देने से इनकार कर दिया। फैजान के पिता इकराम ने कहा कि उनका बेटा लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था और यह एक बेहद महत्वपूर्ण परीक्षा थी। उन्होंने कहा कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण छात्र के पूरे करियर पर असर पड़ सकता है और इस तरह की त्रुटि का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।

एक से ज्यादा छात्र प्रभावित
फैजान अकेले छात्र नहीं थे। खबरों के अनुसार, एक अन्य अभ्यर्थी सार्थक भी इसी तरह की समस्या का शिकार हुआ। बताया गया कि गूगल मैप्स ने उसे भी गलत स्थान दिखाया, जिसके कारण वह समय पर सही परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सका। रिपोर्टिंग समय निकल जाने के बाद उसे भी प्रवेश नहीं दिया गया। इससे संकेत मिलता है कि मामला किसी एक छात्र की व्यक्तिगत चूक का नहीं, बल्कि डिजिटल लोकेशन टैगिंग या मैपिंग से जुड़ी संभावित गड़बड़ी का हो सकता है।

अभिभावकों की नाराजगी
घटना के बाद अभिभावकों और छात्रों ने प्रशासन से मुलाकात कर अपनी शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि यदि परीक्षा केंद्र की लोकेशन गलत दिखाई जा रही थी, तो यह छात्रों की गलती नहीं मानी जा सकती। उन्होंने अधिकारियों से मांग की कि ऐसे छात्रों के लिए कोई विशेष राहत या वैकल्पिक समाधान निकाला जाए ताकि तकनीकी त्रुटि के कारण उनका एक साल बर्बाद न हो। कई अभिभावकों ने यह भी कहा कि अब प्रतियोगी परीक्षाओं में पहुंचने के लिए लगभग हर परिवार डिजिटल मैप्स और ऑनलाइन लोकेशन सेवाओं पर निर्भर है। ऐसे में यदि आधिकारिक केंद्र की लोकेशन ही गलत टैग हो, तो उसका सीधा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ता है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया
मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से बातचीत की। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि छात्रों को किसी प्रकार की राहत मिलेगी या नहीं। अभी तक कोई औपचारिक राहत उपाय घोषित नहीं किया गया है। यह भी सामने आया है कि प्रशासन मामले की परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रहा है, लेकिन परीक्षा के नियमों के तहत रिपोर्टिंग समय समाप्त होने के बाद प्रवेश देना आमतौर पर संभव नहीं होता। यही वजह है कि मामला और संवेदनशील हो गया है।

तकनीक पर निर्भरता और जोखिम
यह घटना उस बढ़ती समस्या को उजागर करती है जिसमें छात्र परीक्षा, इंटरव्यू या अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों तक पहुंचने के लिए पूरी तरह गूगल मैप्स जैसी नेविगेशन सेवाओं पर निर्भर हो गए हैं। यदि लोकेशन गलत हो, पिन गलत सेव हो, या ऐप किसी समान नाम वाले दूसरे संस्थान पर ले जाए, तो इसका गंभीर परिणाम हो सकता है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के ही एक अन्य मामले में ग्रेटर नोएडा-हापुड़ मार्ग पर गूगल मैप्स के बताए रास्ते का अनुसरण करते हुए एक परिवार की कार नाले में फंस गई थी, जिसके बाद उन्हें बचाया गया। मुरादाबाद की घटना ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लिए सिर्फ डिजिटल मैप्स पर भरोसा करना पर्याप्त है।

आगे क्या?
फिलहाल प्रभावित छात्र और उनके परिवार प्रशासन तथा संबंधित परीक्षा अधिकारियों से राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं। यदि इस मामले में कोई आधिकारिक निर्णय नहीं आता, तो यह उन छात्रों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, जिन्होंने महीनों की तैयारी के बाद केवल एक लोकेशन त्रुटि की वजह से परीक्षा गंवा दी।

यह मामला परीक्षा प्रबंधन से जुड़े कई अहम सवाल खड़े करता है
क्या परीक्षा केंद्रों की वेरिफाइड डिजिटल लोकेशन पहले से उपलब्ध कराई जानी चाहिए?
क्या एडमिट कार्ड के साथ आधिकारिक मैप लिंक देना जरूरी होना चाहिए?
और क्या तकनीकी त्रुटि से प्रभावित छात्रों के लिए आपातकालीन अपील व्यवस्था होनी चाहिए?
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं का पूरा ढांचा अब तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर होता जा रहा है।

Payal Singh

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