उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश न देने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि ऐसे 12 निजी स्कूलों को तीन दिन का अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर स्कूल प्रबंधन चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं देता है, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने इस संबंध में Basic Shiksha Adhikari Office को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत चयनित बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की कानूनी जिम्मेदारी है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026-27 के लिए लखनऊ में आरटीई के तहत 16 हजार से अधिक बच्चों का चयन किया गया था। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के प्रयासों से अब तक 12,500 से ज्यादा बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश दिलाया जा चुका है।
वहीं, लगभग 2,500 अभिभावकों ने स्कूल की दूरी या अन्य व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं की। प्रशासन अब शेष बच्चों के दाखिले को सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है। जिला प्रशासन का कहना है कि शिक्षा का अधिकार कानून का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई संस्थान जानबूझकर नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।
इस आदेश के बाद निजी स्कूल प्रबंधन के बीच हलचल बढ़ गई है। शिक्षा विभाग आने वाले दिनों में नोटिस का जवाब और स्कूलों की कार्रवाई की समीक्षा करेगा।







Comments