शेयर बाजार में 2 जुलाई को सकारात्मक माहौल के बीच वेदांता लिमिटेड के डिमर्जर के बाद बनी चार नई कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस उछाल की मुख्य वजह इन शेयरों का टी2टी (Trade-to-Trade) सेगमेंट से बाहर आना और इनमें इंट्राडे ट्रेडिंग की शुरुआत होना है।
वेदांता लिमिटेड के व्यवसाय के पुनर्गठन के बाद बनी चार नई कंपनियां 15 जून 2026 को शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थीं। लिस्टिंग के बाद नियामकीय नियमों के तहत इन शेयरों को शुरुआती 10 ट्रेडिंग सत्रों के लिए टी2टी सेगमेंट में रखा गया था, जहां केवल डिलीवरी आधारित कारोबार की अनुमति होती है। अब यह अवधि समाप्त होने के बाद इन शेयरों में सामान्य ट्रेडिंग और इंट्राडे लेनदेन शुरू हो गया है।
कारोबार के दौरान वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड के शेयर में 20 प्रतिशत का अपर सर्किट लगा और यह 38.76 रुपये पर बंद हुआ। वेदांता पावर लिमिटेड का शेयर 17 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 47.20 रुपये तक पहुंचा, हालांकि बाद में मुनाफावसूली के चलते यह 44.25 रुपये पर बंद हुआ। वहीं वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड में भी 10 प्रतिशत का अपर सर्किट लगा, जबकि वेदांता एल्यूमिनियम मेटल लिमिटेड में सीमित बढ़त दर्ज की गई।
दूसरी ओर, मूल कंपनी वेदांता लिमिटेड के शेयर पर दबाव देखने को मिला और कारोबार समाप्त होने तक यह लगभग 1.9 प्रतिशत गिरकर 275.50 रुपये पर बंद हुआ। विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों का ध्यान डिमर्जर के बाद बनी नई कंपनियों की ओर अधिक है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, टी2टी सेगमेंट से बाहर आने के बाद शेयरों में तरलता (Liquidity) बढ़ती है और इंट्राडे ट्रेडिंग शुरू होने से कारोबार की मात्रा और निवेशकों की भागीदारी में भी वृद्धि होती है। यही कारण है कि इन शेयरों में तेज़ खरीदारी देखने को मिली।
हालांकि विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि एक दिन की तेज़ रैली देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला न करें। उनका कहना है कि किसी भी कंपनी में निवेश से पहले उसके कारोबार, वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का मूल्यांकन करना जरूरी है। तेज़ उछाल के बाद मुनाफावसूली की संभावना भी बनी रहती है।
निष्कर्ष
वेदांता डिमर्जर के बाद बनी नई कंपनियों के शेयरों में टी2टी से बाहर आने के बाद उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को केवल तेजी के आधार पर निर्णय लेने के बजाय जोखिम और कंपनी की बुनियादी स्थिति का आकलन करना चाहिए।




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