तमिलनाडु के थूथुकुडी में 21 जून को एक बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाली मौसमीय घटना दर्ज की गई, जब एक फनलनुमा बवंडर कुछ समय के लिए जमीन पर उतरता दिखाई दिया। दक्षिण भारत में इस तरह की घटनाएं आमतौर पर बहुत कम देखी जाती हैं, इसलिए इस दृश्य ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ मौसम विशेषज्ञों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया। स्थानीय मौसम पर्यवेक्षकों और प्रमाणित मौसम विज्ञानियों द्वारा साझा किए गए वीडियो में एक संकरा, घूमता हुआ फनल क्लाउड आंधी वाले बादल से नीचे उतरता दिखाई देता है। वीडियो में यह संरचना जमीन तक पहुंचती नजर आती है और उसके संपर्क में आते ही धूल व मलबा उड़ने लगता है। कुछ ही क्षणों बाद यह संरचना कमजोर पड़ती और गायब होती दिखाई देती है।
मौसम विशेषज्ञों ने क्या कहा?
मौसम विज्ञानी नवदीप दहिया सहित कई स्थानीय मौसम विशेषज्ञों ने वीडियो का अध्ययन करने के बाद कहा कि यह संरचना एक वास्तविक फनलनुमा बवंडर जैसी दिखती है। हालांकि इसकी तीव्रता बहुत अधिक नहीं थी और यह ज्यादा देर तक सक्रिय नहीं रहा, फिर भी इसे सामान्य बादल गतिविधि नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह घटना संभवतः “लैंडस्पाउट” थी। लैंडस्पाउट बवंडर का अपेक्षाकृत कमजोर प्रकार होता है, जो आमतौर पर सतह के पास पहले से मौजूद हवा के घूर्णन और ऊपर उठती अस्थिर हवा के मेल से बनता है। यह पारंपरिक सुपरसेल बवंडर की तरह बहुत शक्तिशाली नहीं होता, लेकिन फिर भी स्थानीय स्तर पर नुकसान पहुंचा सकता है।
बवंडर बनता कैसे है?
बवंडर मूल रूप से एक तेजी से घूमने वाला वायु स्तंभ होता है, जो गरज वाले बादल से जमीन तक फैला होता है। जब हवा में नमी संघनित होकर बादल की बूंदों में बदलती है और जमीन के पास धूल या मलबा उठने लगता है, तो यह फनलनुमा संरचना साफ दिखाई देने लगती है।
ऐसी घटनाओं के लिए आमतौर पर कुछ प्रमुख स्थितियां जरूरी होती हैं:

गर्म और नम हवा
तेज ऊपर उठने वाली वायु धाराएं
निचले स्तर पर हवा का घूर्णन
यदि ये परिस्थितियां स्थानीय स्तर पर एक साथ बन जाएं, तो कमजोर लेकिन वास्तविक बवंडर जैसे दृश्य सामने आ सकते हैं।
तमिलनाडु में यह घटना क्यों खास है?
भारत में बवंडर की घटनाएं सबसे ज्यादा पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और ओडिशा में दर्ज की जाती हैं, खासकर प्री-मानसून सीजन के दौरान। तमिलनाडु में बवंडर बहुत दुर्लभ हैं क्योंकि यहां का मानसूनी और तूफानी पैटर्न आमतौर पर ऐसी संरचनाओं के विकास के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसी वजह से थूथुकुडी में दिखाई दिया यह बवंडर एक असामान्य और उल्लेखनीय मौसमीय घटना बन गया है।
नुकसान की स्थिति

फिलहाल इस घटना से किसी बड़े नुकसान, चोट या जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कमजोर बवंडर भी अगर आबादी वाले इलाके, सड़क, खेत या अस्थायी ढांचों के ऊपर से गुजरें, तो वे खतरा पैदा कर सकते हैं। इसलिए स्थानीय स्तर पर ऐसे मौसमीय बदलावों की निगरानी और समय पर सूचना देना बेहद जरूरी है।
मौसम प्रेमियों के लिए आकर्षण, प्रशासन के लिए चेतावनी
थूथुकुडी का यह दृश्य मौसम प्रेमियों और पर्यवेक्षकों के लिए जितना रोमांचक रहा, उतना ही यह प्रशासन और मौसम एजेंसियों के लिए एक संकेत भी है कि दक्षिण भारत में स्थानीय तूफानी गतिविधियां अपेक्षा से अधिक जटिल और अप्रत्याशित हो सकती हैं। यह घटना दिखाती है कि मौसम विज्ञान में केवल बड़े चक्रवात या भारी बारिश ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर बनने वाली छोटी लेकिन असाधारण घटनाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।







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