गोरखपुर में 9 महीने की बच्ची से दरिंदगी, 12 वर्षीय किशोर हिरासत में; खेत के पास गंभीर हालत में मिली मासूम
गुलरिहा इलाके में रात 2 बजे घर से गायब हुई बच्ची सुबह खेत के पास घायल मिली; पुलिस ने एक 12 वर्षीय किशोर को हिरासत में लेकर मोबाइल और डिजिटल गतिविधियों की जांच शुरू की।
By Payal SinghPublished 21 Jun 2026, 10:06 PMUpdated 13 Jul 2026, 05:08 AM3 min read5 views
बच्ची सुबह घर से करीब 500 मीटर दूर खेत के पास घायल अवस्था में मिली।
हालत बिगड़ने पर उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
मामले में 12 वर्षीय एक किशोर को हिरासत में लिया गया है।
पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है।
मामले की जांच किशोर न्याय कानून के तहत की जा रही है।
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Quick Summary
गोरखपुर की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ी बाल सुरक्षा की गहरी चुनौती को भी उजागर करती है। एक 9 महीने की बच्ची का घर से गायब होना और कुछ घंटों बाद गंभीर हालत में मिलना पूरे इलाके को झकझोर देने वाला है। पुलिस ने एक 12 वर्षीय किशोर को हिरासत में लिया है, जिससे मामले की संवेदनशीलता और भी बढ़ जाती है। यह घटना परिवार, समाज और प्रशासन तीनों के लिए चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा अब केवल घरेलू जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामुदायिक और डिजिटल जागरूकता का भी बड़ा मुद्दा बन चुकी है। पुलिस की जांच में मोबाइल और ऑनलाइन गतिविधियों की पड़ताल इस बात की ओर इशारा करती है कि डिजिटल कंटेंट, निगरानी की कमी और कम उम्र में जोखिमपूर्ण एक्सपोज़र भी गंभीर सामाजिक खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के गुलरिहा थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां 9 महीने की एक बच्ची शनिवार तड़के अपने घर से लापता हो गई और अगली सुबह गंभीर हालत में खेत के पास मिली। मामले में पुलिस ने 12 वर्षीय एक किशोर को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार, बच्ची अपनी मां के पास सो रही थी, तभी रात करीब 2 बजे वह घर से गायब हो गई। बच्ची के अचानक लापता होने से परिवार में हड़कंप मच गया और परिजनों ने रात भर गांव और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की।
500 मीटर दूर खेत के पास मिली बच्ची
तलाश के दौरान बच्ची घर से करीब 500 मीटर दूर एक खेत के पास टिन शेड के नजदीक घायल अवस्था में मिली। परिजन तुरंत उसे इलाज के लिए नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां से हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने बच्ची को बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, बच्ची की हालत चिंताजनक बनी हुई है और डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही है।
12 वर्षीय किशोर हिरासत में
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 12 वर्षीय एक किशोर को हिरासत में लिया। अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ में किशोर ने पहले अलग-अलग बयान दिए, लेकिन बाद में उसकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। पुलिस अब उससे जुड़े हर पहलू की गहन जांच कर रही है। चूंकि मामला एक नाबालिग से जुड़ा है, इसलिए पूरी कार्रवाई किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के तहत की जा रही है।
मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों की जांच
जांच के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिए गए किशोर का मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में लिया है। अधिकारियों का कहना है कि उसके फोन और डिजिटल गतिविधियों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों को समझा जा सके।पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी की गतिविधियां, संपर्क और डिजिटल व्यवहार इस घटना से किस तरह जुड़े हो सकते हैं। इसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस अधीक्षक (नगर) निमेश पाटिल ने बताया कि मामला बेहद संवेदनशील है और हर पहलू से जांच की जा रही है। परिवार के सदस्यों, आसपास के लोगों और अन्य संभावित गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट तथा पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इलाके में आक्रोश, परिवार सदमे में
घटना सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश है। एक 9 महीने की बच्ची के साथ हुई इस दरिंदगी ने लोगों को भीतर तक झकझोर दिया है। परिवार गहरे सदमे में है और बच्ची के जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी छोटी बच्ची के साथ हुई यह घटना इंसानियत को शर्मसार करने वाली है और दोषी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
बाल सुरक्षा पर गंभीर सवाल
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, परिवार की सतर्कता और डिजिटल माहौल के असर पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा को लेकर गांवों और शहरों—दोनों जगहों पर संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल पुलिसिंग ही काफी नहीं है, बल्कि परिवार, स्कूल, समुदाय और डिजिटल जागरूकता इन सभी स्तरों पर मजबूत हस्तक्षेप जरूरी है।
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