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दिल्ली में नवजातों की खरीद-फरोख्त का बड़ा खुलासा, लड़का 8 लाख और लड़की 3 लाख में बेचने वाला रैकेट पकड़ा गया

दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो गरीब परिवारों से नवजात शिशु खरीदकर उन्हें निःसंतान दंपतियों को लाखों रुपये में बेचता था।

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दिल्ली में नवजातों की खरीद-फरोख्त का बड़ा खुलासा, लड़का 8 लाख और लड़की 3 लाख में बेचने वाला रैकेट पकड़ा गया

खबर के मुख्य बिंदु

  • दिल्ली पुलिस ने नवजात शिशुओं की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया।
  • गिरोह गरीब परिवारों से बच्चे खरीदकर उन्हें निःसंतान दंपतियों को बेचता था।
  • नवजात लड़कों की कीमत 7–8 लाख रुपये तक और लड़कियों की कीमत 3–4 लाख रुपये तक तय की जाती थी।
  • पुलिस ने पहाड़गंज में आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास गुप्त ऑपरेशन चलाकर तीन आरोपियों को पकड़ा।
  • गिरफ्तार आरोपियों में ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित शामिल हैं।
  • जांच में रोहिणी के एक IVF अस्पताल का नाम सामने आया, जहां कथित तौर पर बच्चों को अस्थायी रूप से रखा जाता था।
  • गिरोह फर्जी अस्पताल रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर सौदे को वैध दिखाने की कोशिश करता था।
  • पुलिस के मुताबिक, नवजात शिशु राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों से दिल्ली लाए जाते थे।
  • गिरोह में सप्लायर, बिचौलिए, ट्रांसपोर्टर, दस्तावेज तैयार करने वाले और खरीदार तक शामिल थे।
  • पुलिस अब पूरे नेटवर्क और अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है।
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Quick Summary

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे संगठित बाल तस्करी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त को एक संगठित आपराधिक कारोबार में बदल दिया था। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह गरीब परिवारों से बच्चे खरीदकर उन्हें निःसंतान दंपतियों को ऊंची कीमत पर बेचता था। जांच में यह भी सामने आया कि बच्चों की कीमत उनके लिंग के आधार पर तय की जाती थी लड़कों के लिए 8 लाख रुपये तक और लड़कियों के लिए 3 से 4 लाख रुपये तक। इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि पूरे नेटवर्क को वैध दिखाने के लिए फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। पुलिस को शक है कि यह केवल दिल्ली तक सीमित मामला नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला हुआ एक बड़ा मानव तस्करी नेटवर्क है। इस खुलासे ने बाल सुरक्षा, अस्पतालों की निगरानी और अवैध गोद लेने के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिल्ली पुलिस ने नवजात शिशुओं की तस्करी के एक बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो कथित तौर पर गरीब परिवारों से बच्चे खरीदकर उन्हें निःसंतान दंपतियों को लाखों रुपये में बेचता था। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह उत्तर भारत के कई राज्यों में सक्रिय था और बच्चों की खरीद-फरोख्त के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था।

आरके आश्रम के पास गुप्त ऑपरेशन, तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस को नवजात शिशुओं की अवैध बिक्री की सूचना मिलने के बाद पहाड़गंज इलाके में आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास एक गुप्त अभियान चलाया गया। इस ऑपरेशन में पुलिस ने नकली ग्राहकों का इस्तेमाल किया, जिन्होंने इच्छुक खरीदार बनकर आरोपियों से संपर्क किया। जांच के दौरान एक नवजात लड़के की बिक्री के लिए बातचीत हुई और संदिग्धों को कथित तौर पर 20 हजार रुपये एडवांस भी दिए गए। इसके बाद पुलिस ने ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित को गिरफ्तार कर लिया।

रोहिणी के IVF अस्पताल से जुड़े सुराग
पूछताछ और आगे की जांच में पुलिस को दिल्ली के रोहिणी इलाके में स्थित एक IVF अस्पताल से जुड़े सुराग मिले। पुलिस के अनुसार, इस अस्पताल का इस्तेमाल कथित तौर पर अस्थायी ठिकाने की तरह किया जा रहा था, जहां नवजात शिशुओं को तब तक रखा जाता था जब तक उनके लिए खरीदार नहीं मिल जाता। जांचकर्ताओं का कहना है कि संतानहीन दंपतियों से संपर्क कर उन्हें अवैध तरीके से बच्चे उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया जाता था।

लड़कों और लड़कियों की अलग-अलग कीमत
पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने नवजात बच्चों की कीमत लिंग के आधार पर तय कर रखी थी।
नवजात लड़के की कीमत लगभग 7 से 8 लाख रुपये तक रखी जाती थी।
नवजात लड़की को लगभग 3 से 4 लाख रुपये में बेचा जाता था।
जांचकर्ताओं का मानना है कि यह अंतर समाज में लड़कों की अधिक मांग को दर्शाता है, जो इस अपराध के सामाजिक पहलू को भी उजागर करता है।

फर्जी दस्तावेजों से बनाया जाता था कानूनी सौदे का भ्रम
पुलिस को ऐसे कई सबूत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि गिरोह फर्जी अस्पताल रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण पत्र, प्रसव संबंधी कागजात और अन्य कानूनी दस्तावेज तैयार करता था। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल बच्चों की वास्तविक पहचान छिपाने और उनके हस्तांतरण को वैध दिखाने के लिए किया जाता था। यानी, यह केवल बच्चों की तस्करी का मामला नहीं, बल्कि दस्तावेजी धोखाधड़ी और संगठित अपराध का भी मामला है।

राजस्थान और गुजरात से दिल्ली तक सप्लाई चेन
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, यह गिरोह नवजात शिशुओं को राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों से दिल्ली लाता था। इसके बाद बच्चों को गिरोह के अलग-अलग सदस्यों और बिचौलियों के जरिए आगे बढ़ाया जाता था, जब तक कि वे अंतिम खरीदार तक नहीं पहुंच जाते। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस नेटवर्क में सप्लायर, बिचौलिए, ट्रांसपोर्टर, अस्पताल से जुड़े लोग, दस्तावेज तैयार करने वाले और खरीदार तक शामिल हो सकते हैं।

पहले भी सामने आ चुका है आरोपी का नाम
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार महिला ज्योति उर्फ कमलेश का नाम पहले भी एक ऐसे ही बाल तस्करी मामले में सामने आ चुका है। इससे संकेत मिलता है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय हो सकता है और इसके तार पहले के मामलों से भी जुड़े हो सकते हैं।

जांच जारी, और गिरफ्तारी संभव
दिल्ली पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही, उन दंपतियों, अस्पतालों और बिचौलियों की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने इस अवैध कारोबार में किसी भी स्तर पर भूमिका निभाई हो सकती है। यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि बाल सुरक्षा, गरीबी, अवैध गोद लेने के नेटवर्क और चिकित्सा संस्थानों की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सामाजिक प्रश्न भी बन गया है।

Payal Singh

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