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बिहार में NEET पुनर्परीक्षा के दौरान पेपर-सॉल्विंग गिरोह का भंडाफोड़, असली छात्रों की जगह परीक्षा देने पहुंचे 9 फर्जी अभ्यर्थी गिरफ्तार

बिहार पुलिस ने NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा के दौरान सक्रिय एक बड़े परीक्षा धोखाधड़ी रैकेट का खुलासा किया। कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं जो नकली पहचान के साथ असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे।

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बिहार में NEET पुनर्परीक्षा के दौरान पेपर-सॉल्विंग गिरोह का भंडाफोड़, असली छात्रों की जगह परीक्षा देने पहुंचे 9 फर्जी अभ्यर्थी गिरफ्तार

खबर के मुख्य बिंदु

  • बिहार में NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।
  • पुलिस ने कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया।
  • इनमें 9 फर्जी अभ्यर्थी शामिल हैं, जो असली छात्रों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे।
  • केंद्रीय विद्यालय, केआरके हाई स्कूल और हसनपुर स्कूल समेत कई केंद्रों पर छापेमारी हुई।
  • गिरफ्तार लोगों से मोबाइल फोन और दस्तावेज बरामद किए गए।
  • पुलिस के अनुसार गिरोह में मेडिकल छात्र भी शामिल थे।
  • जांच जारी है और पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
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Quick Summary

बिहार में पकड़ा गया यह रैकेट दिखाता है कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में संगठित नकल और इम्पर्सनेशन नेटवर्क कितने गहरे तक सक्रिय हैं। यह केवल कुछ छात्रों की अनुचित कोशिश नहीं, बल्कि एक पेशेवर व्यवस्था का संकेत है, जिसमें कथित तौर पर असली उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोग परीक्षा देने भेजे जाते हैं। इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह कार्रवाई री-NEET के दौरान हुई यानी उस परीक्षा में, जिसे पहले से ही पेपर लीक के बाद दोबारा आयोजित किया जा रहा था। ऐसे में यह सवाल और तीखा हो जाता है कि क्या परीक्षा प्रणाली सिर्फ प्रश्नपत्र सुरक्षा तक सीमित है, या पहचान सत्यापन और केंद्र-स्तरीय निगरानी में भी गंभीर खामियां मौजूद हैं।

बिहार में रविवार को आयोजित NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा के दौरान पुलिस ने एक बड़े परीक्षा धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई में कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 9 फर्जी अभ्यर्थी भी शामिल हैं। आरोप है कि ये लोग असली छात्रों की जगह परीक्षा देने के लिए नकली पहचान के साथ विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे थे। यह कार्रवाई उस समय हुई जब पूरे देश में NEET पुनर्परीक्षा कड़ी निगरानी के बीच आयोजित की जा रही थी। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारियों से एक संगठित पेपर-सॉल्विंग और इम्पर्सनेशन नेटवर्क के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं, जिसकी जड़ें कई जिलों और संभवतः राज्य से बाहर तक फैली हो सकती हैं।

कहां-कहां हुई कार्रवाई?
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, एक विशेष पुलिस टीम ने केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र से अकेले सात लोगों को गिरफ्तार किया। इसके अलावा केआरके हाई स्कूल और हसनपुर स्कूल में भी छापेमारी की गई, जहां से एक-एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना है कि ये गिरफ्तारियां सिर्फ परीक्षा केंद्रों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने के लिए कई ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई। यही वजह है कि कुल गिरफ्तारियों की संख्या बढ़कर 30 तक पहुंच गई।

कैसे काम करता था गिरोह?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह का मकसद असली अभ्यर्थियों की जगह फर्जी उम्मीदवारों को परीक्षा दिलवाना था। इसके लिए कथित तौर पर नकली पहचान, फर्जी दस्तावेज और संगठित नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों में कुछ मेधावी मेडिकल छात्र भी शामिल हैं। आशंका है कि इन्हें असली उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देने या परीक्षा में अच्छे अंक सुनिश्चित करने के लिए भर्ती किया गया था। यदि यह बात पूरी तरह पुष्ट होती है, तो मामला सिर्फ स्थानीय नकल गिरोह का नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा से जुड़े प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की संलिप्तता का बन जाएगा।

क्या बरामद हुआ?
लखीसराय की पुलिस अधीक्षक प्रेरणा ने बताया कि गिरफ्तार लोगों से मोबाइल फोन, कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद की गई है। इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह की योजना कितनी व्यापक थी और इसमें किन-किन स्तरों पर लोग शामिल थे। पुलिस अब बाकी 21 संदिग्धों से पूछताछ कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि कौन लोग फर्जी अभ्यर्थी थे, कौन लोग समन्वय कर रहे थे, और क्या इस नेटवर्क के तार किसी बड़े राज्यव्यापी या अंतरराज्यीय परीक्षा माफिया से जुड़े हैं।

री-NEET के दौरान पकड़ा गया रैकेट
इस पूरे मामले की संवेदनशीलता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि यह कार्रवाई री-NEET के दौरान हुई। NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा पहले ही उस विवाद के बाद कराई जा रही थी, जिसमें प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आए थे। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को इसी विवाद के बाद परीक्षा दोबारा आयोजित करनी पड़ी। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि पुनर्परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। लेकिन बिहार में सामने आया यह मामला बताता है कि सिर्फ पेपर सुरक्षा पर्याप्त नहीं है पहचान सत्यापन, केंद्र-स्तरीय निगरानी और स्थानीय इंटेलिजेंस इनपुट भी उतने ही जरूरी हैं।
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देशभर में 22 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी
NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा देशभर में 551 भारतीय शहरों और 14 विदेशी केंद्रों सहित कुल 5,440 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई। इसमें 22 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए। इतने बड़े पैमाने पर होने वाली परीक्षा में किसी भी स्तर पर संगठित फर्जीवाड़ा सामने आना परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

आगे क्या?
पुलिस ने संकेत दिया है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। छापेमारी जारी है और जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि:
असली उम्मीदवारों से संपर्क किसने किया,
फर्जी अभ्यर्थियों की भर्ती कैसे हुई,
क्या परीक्षा केंद्रों के भीतर से भी किसी स्तर पर सहयोग मिला,
और क्या यह नेटवर्क पहले भी इसी तरह की परीक्षाओं में सक्रिय रहा है।
यदि जांच में बड़े संगठित नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय परीक्षा सुरक्षा ढांचे पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।

Payal Singh

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