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27 घंटे बाद यमुना से निकली हाइड्रा, क्षमता से तीन गुना भार पड़ने से टूटा बटेश्वर का पांटून पुल

स्टीमर को किनारे लाने के दौरान हादसा, एक हाइड्रा नदी में समाई; मरम्मत के बाद पुल पर आवागमन बहाल।

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27 घंटे बाद यमुना से निकली हाइड्रा, क्षमता से तीन गुना भार पड़ने से टूटा बटेश्वर का पांटून पुल

खबर के मुख्य बिंदु

  • बटेश्वर के पांटून पुल पर हादसा बुधवार सुबह हुआ।
  • दो हाइड्रा मशीनों और एक स्टीमर का कुल भार लगभग 16 टन था।
  • पुल की भार क्षमता करीब 5 टन बताई गई।
  • अधिक भार के कारण पुल का मुख्य जोड़ टूट गया।
  • एक हाइड्रा मशीन यमुना नदी में समा गई।
  • चालक ने समय रहते नदी में छलांग लगाकर जान बचाई।
  • 27 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद हाइड्रा बाहर निकाली गई।
  • पुल की मरम्मत कर गुरुवार शाम से यातायात बहाल कर दिया गया।
  • कई गांवों का संपर्क हादसे के बाद अस्थायी रूप से बाधित हुआ।
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Quick Summary

आगरा के बटेश्वर स्थित यमुना नदी पर बने पांटून पुल के टूटने की घटना में बड़ी लापरवाही सामने आई है। स्टीमर को मरम्मत के लिए किनारे लाते समय पुल पर निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक भार डाल दिया गया, जिससे पुल का मुख्य हिस्सा टूट गया और एक हाइड्रा मशीन नदी में गिर गई। राहत की बात यह रही कि चालक सुरक्षित बच गया। प्रशासन ने 27 घंटे की मशक्कत के बाद मशीन को बाहर निकाल लिया और पुल की मरम्मत पूरी कर यातायात बहाल कर दिया।

आगरा जिले के तीर्थस्थल बटेश्वर में यमुना नदी पर बने पांटून पुल पर बुधवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, एक सवारी स्टीमर को मरम्मत के लिए नदी के किनारे लाया जा रहा था। इस कार्य में दो हाइड्रा मशीनों की मदद ली जा रही थी।

क्षमता से अधिक भार बना हादसे की वजह
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पांटून पुल की भार क्षमता लगभग 5 टन थी, जबकि दो हाइड्रा मशीनों और स्टीमर का कुल भार करीब 16 टन था। निर्धारित क्षमता से तीन गुना अधिक वजन पड़ने के कारण पुल का मुख्य जोड़ अचानक टूट गया।

नदी में समा गई हाइड्रा मशीन
पुल टूटते ही एक हाइड्रा मशीन सीधे यमुना नदी में गिर गई। मशीन चला रहे चालक श्याम यादव ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते नदी में छलांग लगा दी, जिससे उसकी जान बच गई।

कई गांवों का संपर्क हुआ प्रभावित
हादसे के बाद यमुना पार स्थित कल्याणपुर, भरतार समेत कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया। पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

27 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना के बाद संबंधित विभाग और बचाव दल मौके पर पहुंचे। लगातार 27 घंटे तक चले अभियान के बाद गुरुवार को नदी में डूबी हाइड्रा मशीन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

पुल की मरम्मत के बाद यातायात बहाल
प्रशासन ने क्षतिग्रस्त पांटून पुल की युद्धस्तर पर मरम्मत कराई। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद गुरुवार शाम करीब 6 बजे पुल पर दोबारा आवागमन शुरू कर दिया गया।

Payal Singh

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